The 5-Second Trick For Subconscious Mind



उसने सपने में देखा, उसके खच्चर को एक भेड़िये ने मार दिया है और उसकी पीठ और जांघ के मांस के लोथड़े को नोच-नोचकर खा रहा है। उसकी आंख खुल गयी। मन-ही-मन कहने लगा—यह कैसा पागलपन का सपना है। भला वह दयालू सेवक खच्चर को छोड़कर कहां जा सकता है!

[मनुष्य को किसी एक विद्या या कला में दक्ष हो जाने पर गर्व नहीं करना चाहिए।] १

३. सवाने उमरी-मौलाना रूमी (उर्दू): ले० मौलवी शिबली।

[जब किसी को तुम्हारे काम से हमदर्दी नहीं है तो अपना काम स्वयं ही करना चाहिए। बहुत से लोग मनष्य-भक्षक हैं। तुम उनके अभिवादन करने से (अर्थात् उनकी नम्रता के भम्र में पड़कर) लाभ की

तुम्हारी कला अधिक प्यारे और अधिक शांत हो... "

"हरजत, आप मुझे सिखाते हैं लोग तो ऐसी-ऐसी युक्तियां मुझसे सीख कर जाते हैं।"

नौकर ने इतना कहकर कम कसी और चला गया। खच्चर का इन्तजाम तो उसे क्या करना था। अपने गुझ्टे मित्रों में बैठकर सूफि की हंसी उड़ाने लगा। सूफी रास्ते का हारा-थका ही, लेट गया और अर्द्धनिद्रा की अवस्था में सपना देखने लगा।

तू लोग और परलोक में हमें धैर्य और सुख प्रदान कर। जब हमारा निर्दिष्ट स्थान तू ही है तो रास्ते की मंजिल को भी सुखमय बना दे।"१

हजरत उमर की खिलाफत के जमाने में एक शहर में आग लग गयी। वह ऐसी प्रचंड अग्नि थी, जो पत्थर को भी सूखी लकड़ी की तरह जलाकर राख कर देती थी। वह मकान और मुहल्लों को भी जलाती हुई पक्षियों के घोंसलों तक पहुंची और अंत में उनके परो में भी website लग गयी। इस आग की लपटों ने आधा शहर भून डाला, यहां तक कि पानी भी इस आग को न बुझा सका। लोग पानी और सिरका बरसाते थे, परन्तु ऐसा मालूम होता था कि पानी और सिरका उल्टा आग को तेज कर रहो हैं। अन्त में प्रजा-जन हजरत उमर के पास दौड़ आये और निवेदन किया कि आग किसी से भी नहीं बुझती।

नाटक जो केवल आंशिक रूप से शेक्सपियर के द्वारा लिखे गए हैं एक चाकू (†) के साथ नीचे चिह्नित हैं.

एक माली ने देखा Subconscious Mind Power कि उसके बाग में तीन आदमी चोरों की तरह बिना पूछे घुस आये हैं। उनमें से एक सैयद है, एक सूफी है और एक मौलवी है, और एक से बढ़कर एक get more info उद्दंड और गुस्ताख है। उसने अपने मन में कहा कि ऐसे धूर्तों को दंड देना ही चाहिए, परन्तु उनमें परस्पर बड़ा मेल है और एका ही सबसे बड़ी शक्ति है। मैं अकेला इन तीनों को नहीं जीत सकता। इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि पहले इनको एक-दूसरे से अलग कर दूं। यह सोचकर उसने पहले सूफी से कहा, "हजरात, आप मेरे घर जाइए और इन साथियां के लिए कम्बल ले आइए।" जब सूफी कुछ दूर गया, तो कहने लगा, "क्यों श्रीमान!

ऐ बीमार चींटी, तेरी यह सामर्थ्य कहां कि खुदा तुझपर इतना बड़ा पहाड़ रक्खे?"

ऊंट को दया आयी और कहा, "अच्छा, मेरे कोहान पर चढ़कर बैठ जा। इस तरह आर-पार होना मेरा काम है। तुझ जैसे हजारों को नदी पार करा चुका हूं।"

For those who consistently say "I can't," the Electricity of the words and phrases will repel the universal pressure against you. But should you say "I can!" the universe will endow you with the skills to do just that. So communicate away; relinquish your fears and purge your anger, predict your own personal upcoming and Are living up towards your probable with the 35 affirmations which will improve your life: one.) I'm the architect of my life; I Establish its Basis and pick its contents.

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